योगी के मंत्री धर्मपाल सिंह ने दिया अजीबोगरीब बयान

योगी के मंत्री धर्मपाल सिंह ने दिया अजीबोगरीब बयान

 यूपी के पशुधन और दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने शुक्रवार बोला कि गोमूत्र का छिड़काव करने से घर में आ रही बाधाएं दूर होंगी धर्मपाल सिंह ने फतेहपुर में संवाददाताओं से वार्ता में एक प्रश्न के उत्तर में कहा, "गाय के मूत्र में गंगा मइया का वास होता है, इसके छिड़कने से घर का वास्तुदोष हो या फिर अन्य कोई बाधा सभी दूर होती हैं" उन्होंने यह भी बोला कि गाय के गोबर में लक्ष्मीजी का वास होता है

गोशालाओं में गायों की दुर्दशा के प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बोला कि गोशालाओं के सुधार के लिये गवर्नमेंट सतत प्रयासरत है और जल्द ही समस्याओं का निवारण कर लिया जायेगा दुग्ध विकास मंत्री ने बांदा जाने से पहले फतेहपुर जिले में पार्टी पदाधिकारियों और विधायकों से भेंट की इसके बाद जिले के आला ऑफिसरों के साथ विकास भवन में बैठक कर गोशालाओं के संबंध में कई निर्देश दिए

बीजेपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने कही थी ये बात

इससे पहले मध्य प्रदेश के भोपाल से भाजपा की सांसद प्रज्ञा ठाकुर ने गाय के मूत्र को लेकर बयान दिया था प्रज्ञा ठाकुर ने बोला था, मैं हर रोज गौ मूत्र का सेवन करती हूं जिसके करण मुझे कोविड-19 नहीं हुआ और अब तक मैं इस रोग से बची हुई हूं ध्यान रहे कि चिकित्सक कोविड-19 में गौमूत्र आदि का सेवन नहीं करने को लेकर राय देते रहे हैं


सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही, 9 महीने के मासूम दुर्लभ रोग से ग्रसित

सरकारी अस्पताल की बड़ी लापरवाही,  9 महीने के मासूम दुर्लभ रोग से ग्रसित

Samastipur: समस्तीपुर के सरकारी हॉस्पिटल से एक बड़ी ढिलाई का मामला सामने आया है जन्म के समय ठीक ट्रीटमेंट ना मिलने की वजह से बच्चा सेवरल पल्सी रोग से ग्रसित हो गया वहीं, बच्चे के परिजन चिकित्सक को दोषी मान रहे हैं साथ ही, वह चिकित्सक पर कार्रवाई और बेटे के उपचार की मांग कर रहे हैं वहीं, सिविल सर्जन इस मुद्दे अलग-अगल दे  दलील

वहीं, बच्चे के माता-पिता का बोलना है कि 24 अप्रैल 2021 को विभूतिपुर पीएचसी हॉस्पिटल में अभिनंदन का जन्म हुआ था जन्म के समय बच्चे को किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं थी चिकित्सक ने उसे स्वस्थ्य होने की बात कहकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया था 

लेकिन कुछ महीने बीतने के बाद जब अभिनंदन ने उठना-बैठना प्रारम्भ नहीं किया तब उन लोगों ने उसका निजी हॉस्पिटल में उपचार कराना प्रारम्भ किया उपचार के दौरान चिकित्सक ने एमआरआई करने की राय दी एमआरआई रिपोर्ट में उन्हें जानकारी मिली कि, बच्चे के ब्रेन को प्रयाप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण वह सीपी कैटेगरी में जा चुका है

परिजनों ने बताया कि अब तक बच्चे के उपचार में काफी रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब वो बच्चे को बेहतर उपचार देने के लिए सक्षम नहीं हैं परिजन इस ढिलाई को लेकर डीएम से लेकर सीएस तक न्याय की गुहार लगा चुके है परिजन ने बताया कि सिविल सर्जन इसे ढिलाई नही मान रहे हैं,  एमआरआई रिपोर्ट को आधार नहीं मानते हुए वो इसे वंशानुगत रोग बता रहे हैं पीड़ित परिजन शासन और प्रशासन से बच्चे के समुचित उपचार के साथ दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं

वहीं, इस मुद्दे पर सिविल सर्जन डॉ एस के चौधरी का बोलना है कि वो सिविल सर्जन के साथ साथ एक शिशु रोग जानकार भी है जहां तक इस बच्चे की रोग की बात है इस तरह की कठिनाई के लिए कुछ हद तक ऑक्सीजन की कमी को बताया जा सकता है, लेकिन इसके अन्य कारण भी होते हैं जैसे- डिलीवरी में किसी तरह की कठिनाई या लेट होने की वजह से सिवरल पल्सी जैसी रोग होती है जहां तक ऑक्सीजन की कमी की बात है, हमारे किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है हालांकि, मुख्यमंत्री ने बच्चे के उपचार के लिए हर 
संभव सहायता का भरोसा जरूर दिया है

सरकारी हॉस्पिटल में बच्चे के जन्म के बाद इस तरह की गंभीर रोग से ग्रसित होने के आरोप को लेकर चाहे डॉक्टर जिम्मेवार हो या कोई अन्य कारण हो, लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि इस मासूम बच्चे के उपचार के लिये स्वास्थ्य विभाग अब कितना संवेदनशील होता है आवश्यकता है कमियों को ढ़कने के बजाय इस मासूम को समुचित उपचार उपलब्ध कराने की ताकि अभिनंदन भी अन्य बच्चों कि तरह बेहतर जीवन जी सके