सरकारी नौकरी में महिलाओ को मिलेगा आरक्षण

सरकारी नौकरी में महिलाओ को मिलेगा आरक्षण

बम्बई उच्च न्यायालय ने महाराष्ट्र गवर्नमेंट को उस स्त्री की राज्य पुलिस विभाग में नियुक्ति को 2 महीने के भीतर आखिरी रूप देने का निर्देश दिया है, जिसने संबंधित परीक्षा तो उत्तीर्ण कर ली थी, लेकिन मेडिकल के दौरान यह बात सामने आने के बाद अपना पद गंवा बैठी कि वह एक 'पुरुष' है. न्यायालय ने यह निर्णय पिछले सप्ताह उस समय सुनाया, जब राज्य के महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोनी ने न्यायालय को बताया कि राज्य गवर्नमेंट ने स्त्री को पुलिस विभाग में नियुक्त करने का निर्णय किया है, लेकिन 'कांस्टेबल से इतर पद' पर. उन्होंने बोला कि विशेष आईजी (नासिक) स्त्री की योग्यता को ध्यान में रखते हुए राज्य के गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव को एक सिफारिश सौंपेंगे. याचिकाकर्ता स्त्री के लिए रोजगार की शर्तें और फायदा उसके स्तर के अन्य कर्मचारियों के समान होंगे, जिन्हें मानक प्रक्रिया के अनुसार भर्ती किया जाता है. पीठ ने राज्य की ओर से कही गई बात स्वीकार कर ली और तदनुसार प्रक्रिया को पूरा करने के लिए राज्य गवर्नमेंट और पुलिस विभाग को 2 महीने का समय दिया. पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण मामला है. याचिकाकर्ता में कोई गुनाह नहीं निकाला जा सकता, क्योंकि उसने एक स्त्री के रूप में अपना करियर बनाया है.'

यह है मामला

पीठ 23 वर्षीय स्त्री की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसने अनुसूचित जाति (एससी) श्रेणी के अनुसार नासिक ग्रामीण पुलिस भर्ती 2018 के लिए आवेदन किया था. उसने लिखित और शारीरिक परीक्षण उत्तीर्ण की. हालांकि, बाद में मेडिकल में पता पता चला कि उसके पास गर्भाशय और अंडाशय नहीं है. अन्य जांच से पता चला कि उसके पास पुरुष और स्त्री दोनों गुणसूत्र थे और इसमें बोला गया कि वह 'पुरुष' थी. इसके बाद स्त्री ने यह कहते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कि उसे अपने शरीर के बारे में इन तथ्यों की जानकारी नहीं थी. उसने बोला कि वह जन्म से ही एक स्त्री के रूप में रह रही थी और उसके सभी शैक्षिक प्रमाणपत्र और पर्सनल डॉक्यूमेंट्स एक स्त्री के नाम से दर्ज़ हैं. उसे सिर्फ इसलिए भर्ती से वंचित नहीं किया जा सकता है, क्योंकि 'कार्योटाइपिंग क्रोमोसोम' जांच ने उसे पुरुष घोषित कर दिया है.


अमित बघेल पर जैन समाज के अपमान का लगा आरोप

अमित बघेल पर जैन समाज के अपमान का लगा आरोप

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में शनिवार को व्यापारी सड़कों पर उतरेंगे. मामला जैन मुनियों पर की गई अमर्यादित टिप्पणी से जुड़ा है. सकल जैन समाज और शहर के व्यापारिक संगठनों के व्यापारी शनिवार को इसी वजह से पैदल मार्च निकालेंगे. ये सभी जैन दादा बाड़ी में सभा के बाद राजभवन के लिए निकलेंगे.

सकल जैन समाज के गजराज पगारिया ने पैदल मार्च निकालने की अनुमति रायपुर के जिला प्रशासन से मांगी थी. इन्हें अनुमति मिल गई है. गवर्नर और सीएम के नाम ज्ञापन लेकर सकल जैन समाज के लोग और व्यवसायी रैली निकालेंगे. इन सभी की मांग है कि जैन मुनियों के विरूद्ध विवादित बयान देने वाले छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना के प्रमुख अमित बघेल के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई की जाए.

दंतेवाड़ा में सौंपी गई शिकायत
छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल के विरूद्ध दंतेवाड़ा जिले के गीदम थाना में कम्पलेन का आवेदन दिया गया. शुक्रवार को गीदम में जैन समुदाय के सैकड़ों लोगों ने रैली निकालकर विरोध जताया. सकल जैन श्री संघ के अध्यक्ष विमल सुराना ने बोला कि, छत्तीसगढ़ में सीएम भूपेश बघेल ने जैन समुदाय के मुनियों को राज्य मेहमान का दर्जा दिया है. उन्हीं जैन मुनियों पर इस तरह की अमर्यादित टिप्पणी करना यह बर्दाश्त से बाहर है.

तिल्दा में दुकानदार गुस्से में
अमित बघेल के विरूद्ध एफआइआर दर्ज करने और कार्रवाई की मांग तिल्दा में भी की गई है, जैन समाज ने नेवरा के एसडीएम को ज्ञापन सौंपा है. समाज के अध्यक्ष मनोज कुमार जैन, ने बोला छत्तीसगढ़ क्रांति सेना के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने अल्पसंख्यक एवं अहिंसक जैन समाज के धार्मिक गुरु मूल्यों के प्रति आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए जैन समाज का अपमान किया है.

ये है पूरा मामला
25 मई को बालोद के सरदार वल्लभ भाई पटेल मैदान में छतीसगढ़िया क्रांति सेना का कार्यक्रम आयोजित था. इसमें संगठन के प्रदेश अध्यक्ष अमित बघेल ने जैन मुनियों पर मंच से टिप्पणी की. जैन समुदाय के लोगों को बाहरी बताकर इनका विरोध किया. इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो जैन समाज ने बघेल की बातों पर कड़ी विरोध जताई. अब उसी बयान की वजह से पूरे प्रदेश में बवाल मचा हुआ है.