फंसे ऋण में गिरावट से एसबीआई का चौथी तिमाही में फायदा

फंसे ऋण में गिरावट से एसबीआई का चौथी तिमाही में फायदा

फंसे ऋण में गिरावट से एसबीआई का चौथी तिमाही में फायदा 41 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 9,114 करोड़ पहुंच गया. एक वर्ष पहले उसे 6,451 करोड़ का फायदा हुआ था. समेकित आधार पर बैंक का फायदा 9,549 करोड़ रुपये रहा.


इस दौरान सकल एनपीए 4.98 फीसदी से घटकर 3.97 प्रतिशत रह गया. शुद्ध एनपीए भी 1.5 फीसदी से घटकर 1.02 फीसदी रहा. बैंक ने 7.10  रुपये प्रति शेयर का लाभांश घोषित किया है. 

बैंक ऑफ बड़ौदा को 1779 का फायदा
बैंक ऑफ बड़ौदा को मार्च तिमाही में 1,779 करोड़ का लाभ हुआ है. एक वर्ष पहले इसी अवधि में फायदा 1,047 करोड़ रुपये था. पूरे वर्ष के दौरान बैंक का कुल फायदा बढ़कर 7,272 करोड़ पहुंच गया.

यूनियन बैंक को आठ फीसदी ज्यादा लाभ
बैंक का फायदा चौथी तिमाही में 8 प्रतिशत बढ़कर 1,440 करोड़ पहुंच गया. पूरे वर्ष में फायदा 80 फीसदी बढ़कर 5,232 करोड़ पहुंच गया. सकल एनपीए घटकर 11.11 फीसदी रह गया.

वनस्पति ऑयल आयात 13 प्रतिशत घटकर 9.12 लाख टन
खाद्य एवं गैर-खाद्य तेलों सहित वनस्पति ऑयल का आयात इस वर्ष अप्रैल में 13 फीसदी घटकर 9.12 लाख टन रह गया. अप्रैल, 2021 में यह 10,53,347 टन था.

सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इण्डिया (एसईए) के शुक्रवार के आंकड़ों के मुताबिक, इस दौरान खाद्य तेलों का आयात पिछले वर्ष अप्रैल के 10,29,912 टन से कम होकर 9,00,085 टन रह गया. गैर-खाद्य तेलों का आयात भी 23,435 टन से घटकर 11,761 टन रह गया. ऑयल विपणन साल नवंबर से अक्तूबर तक चलता है. 


दुर्लभ रोग से ग्रसित हुआ 9 महीने का मासूम पढे पूरी खबर

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Samastipur: समस्तीपुर के सरकारी हॉस्पिटल से एक बड़ी ढिलाई का मामला सामने आया है जन्म के समय ठीक ट्रीटमेंट ना मिलने की वजह से बच्चा सेवरल पल्सी रोग से ग्रसित हो गया वहीं, बच्चे के परिजन चिकित्सक को दोषी मान रहे हैं साथ ही, वह चिकित्सक पर कार्रवाई और बेटे के उपचार की मांग कर रहे हैं वहीं, सिविल सर्जन इस मुद्दे अलग-अगल दे  दलील

वहीं, बच्चे के माता-पिता का बोलना है कि 24 अप्रैल 2021 को विभूतिपुर पीएचसी हॉस्पिटल में अभिनंदन का जन्म हुआ था जन्म के समय बच्चे को किसी भी तरह की कोई कठिनाई नहीं थी चिकित्सक ने उसे स्वस्थ्य होने की बात कहकर हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर दिया था 

लेकिन कुछ महीने बीतने के बाद जब अभिनंदन ने उठना-बैठना प्रारम्भ नहीं किया तब उन लोगों ने उसका निजी हॉस्पिटल में उपचार कराना प्रारम्भ किया उपचार के दौरान चिकित्सक ने एमआरआई करने की राय दी एमआरआई रिपोर्ट में उन्हें जानकारी मिली कि, बच्चे के ब्रेन को प्रयाप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिलने के कारण वह सीपी कैटेगरी में जा चुका है

परिजनों ने बताया कि अब तक बच्चे के उपचार में काफी रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन अब वो बच्चे को बेहतर उपचार देने के लिए सक्षम नहीं हैं परिजन इस ढिलाई को लेकर डीएम से लेकर सीएस तक न्याय की गुहार लगा चुके है परिजन ने बताया कि सिविल सर्जन इसे ढिलाई नही मान रहे हैं,  एमआरआई रिपोर्ट को आधार नहीं मानते हुए वो इसे वंशानुगत रोग बता रहे हैं पीड़ित परिजन शासन और प्रशासन से बच्चे के समुचित उपचार के साथ दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं

वहीं, इस मुद्दे पर सिविल सर्जन डॉ एस के चौधरी का बोलना है कि वो सिविल सर्जन के साथ साथ एक शिशु रोग जानकार भी है जहां तक इस बच्चे की रोग की बात है इस तरह की कठिनाई के लिए कुछ हद तक ऑक्सीजन की कमी को बताया जा सकता है, लेकिन इसके अन्य कारण भी होते हैं जैसे- डिलीवरी में किसी तरह की कठिनाई या लेट होने की वजह से सिवरल पल्सी जैसी रोग होती है जहां तक ऑक्सीजन की कमी की बात है, हमारे किसी भी सरकारी हॉस्पिटल में ऑक्सीजन की कोई किल्लत नहीं है हालांकि, मुख्यमंत्री ने बच्चे के उपचार के लिए हर 
संभव सहायता का भरोसा जरूर दिया है

सरकारी हॉस्पिटल में बच्चे के जन्म के बाद इस तरह की गंभीर रोग से ग्रसित होने के आरोप को लेकर चाहे डॉक्टर जिम्मेवार हो या कोई अन्य कारण हो, लेकिन बड़ा प्रश्न यह है कि इस मासूम बच्चे के उपचार के लिये स्वास्थ्य विभाग अब कितना संवेदनशील होता है आवश्यकता है कमियों को ढ़कने के बजाय इस मासूम को समुचित उपचार उपलब्ध कराने की ताकि अभिनंदन भी अन्य बच्चों कि तरह बेहतर जीवन जी सके