शिविर की आरंभ के मौके पर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा...

शिविर की आरंभ के मौके पर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा...

'परिवारवाद' के आरोपों का अकसर सामना करने वाली कांग्रेस पार्टी अब 'एक परिवार, एक टिकट' की व्यवस्था बनाने पर विचार कर रही है. हालांकि इस प्रस्ताव को सहमति मिलने की स्थिति में इसके साथ यह प्रावधान भी होगा कि एक परिवार के किसी दूसरे सदस्य को टिकट तभी मिलेगा जब वह पार्टी के लिए कम से कम पांच वर्ष तक काम करे. पार्टी महासचिव अजय माकन के अनुसार, चिंतन शिविर में चर्चा के लिए ऐसा प्रस्ताव आया है. उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'हमारा मानना है कि बदलते समय के साथ संगठन का ढांचा नहीं बदला है. अभी भी काम का ढांचा पुराना है और इसमें आमूलचूल परिवर्तन नहीं हुआ है.'

चिंतन शिविर के लिए बनी संगठन संबंधी समन्वय समिति के सदस्य माकन के अनुसार, 'एक परिवार, एक टिकट पर सहमति बन रही है. ऐसा नहीं होना चाहिए कि किसी पुराने नेता का बेटा एकाएक चुनाव लड़ ले. यदि किसी को चुनाव लड़ना है तो उसे संगठन के लिए अपने पांच वर्ष देने होंगे.' इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने की स्थिति में गांधी-नेहरू परिवार से राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा के अगला लोकसभा चुनाव लड़ने का रास्ता साफ रहेगा क्योंकि प्रियंका 2019 के प्रारम्भ में एक्टिव राजनीति में उतरी थीं. इसके साथ ही, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और उनके पुत्र वैभव गहलोत के एक साथ चुनाव लड़ने में परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा, 'हम लोग हमेशा अक्सर चुनाव के लिए सर्वेक्षण एजेंसियों की सेवा लेते हैं. यह चर्चा हुई है और सर्वसम्मति है कि कांग्रेस पार्टी का अपना 'पब्लिक इनसाइट डिपार्टमेंट' होना चाहिए.' उन्होंने यह भी बताया कि संगठन में क्षेत्रीय समिति से लेकर कांग्रेस पार्टी कार्य समिति तक, हर समिति में 50 फीसदी जगह 50 वर्ष से कम उम्र के लोगों को दिए जाने का भी प्रस्ताव रखा गया है. चिंतन शिविर के लिए बनी सियासी मामलों की समन्वय समिति के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने बीजेपी के विरूद्ध गठबंधन की आसार पर कहा, 'पहले तो हम अपने घर को ठीक ढंग से व्यवस्थित करना चाहते हैं. हम कांग्रेस पार्टी को बहुत अधिक एक्टिव और ताकतवर बनाना चाहते हैं. फिर गठबंधन की बात करेंगे.' उन्होंने कहा, 'अगर आपका अपना कोई निवेश नहीं होगा, तो कौन सा साझेदार आकर कहेगा कि वह आपके साथ पैसे का निवेश करेगा.'

डर का माहौल बनाना है पीएम का एजेंडा : सोनिया

शिविर की आरंभ के मौके पर कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा, 'चिंतिन शिविर हमें यह अवसर देता है कि हम राष्ट्र के सामने खड़ी उन चुनौतियों पर चर्चा करें जो बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) द्वारा पैदा की गई हैं.' कांग्रेस पार्टी अध्यक्ष ने पीएम पर निशाना साधते हुए कहा, 'यह साफ हो गया है कि पीएम और उनके साथियों की ओर से 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' की जो बात की जाती है उसका क्या मतलब है? इसका मतलब लगातार ध्रुवीकरण करना और डर का माहौल बनाना है.' उन्होंने यह आरोप लगाया कि इस गवर्नमेंट के 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' का मतलब अल्पसंख्यकों को डराना है जबकि अल्पसंख्यक राष्ट्र के बराबर के नागरिक हैं. इस गवर्नमेंट के 'न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन' का मतलब सियासी विरोधियों को डराना धमकाना, उन्हें बदनाम करना और सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग कर उन्हें कारागार में डालना है.' उन्होंने कहा, 'हमारे संगठन के समक्ष परिस्थितियां अभूतपूर्व हैं. हमें सुधार की कठोर आवश्यकता है. रणनीति में परिवर्तन की आवश्यकता है. प्रतिदिन काम करने के ढंग में बदलाव की आवश्यकता है.'

गोपनीयता पर पूरा जोर, मोबाइल भी प्रतिबंधित

शिविर में राजनीति, सामाजिक न्याय एवं सशक्तीकरण, अर्थव्यवस्था, संगठन, किसान एवं कृषि तथा युवाओं से जुड़े विषयों पर छह भिन्न-भिन्न समूहों में 430 नेता चर्चा कर रहे हैं. इन समूहों की बैठकों की गोपनीयता रखने के मद्देनजर ही इसमें शामिल नेताओं को मोबाइल फोन अंदर ले जाने की अनुमति नहीं दी गई है. उन्होंने बोला कि बैठक स्थलों पर डेलीगेट के अतिरिक्त कोई और उपस्थित नहीं रहेगा. कांग्रेस पार्टी सूत्रों का बोलना है कि अतीत के कुछ अनुभवों को देखते हुए इन बैठकों में गोपनीयता पर जोर दिया गया है. सूत्रों के अनुसार, पिछले दिनों कांग्रेस पार्टी कार्य समिति की बैठक में सोनिया गांधी ने भी इस बात का उल्लेख किया कि इन बैठकों में जो बातें होती हैं वो सब बाहर चली जाती हैं.


बस्तर में पिछले तीन सालों में बैकफुट पर नक्सली

बस्तर में पिछले तीन सालों में बैकफुट पर नक्सली

Bastar Naxal: बस्तर में पिछले 3 वर्षों में नक्सलवाद काफी कमजोर हुआ है इसके पीछे वजह ये है कि अब गांव-गांव तक विकास पहुंच रहा है और पुलिस कैंप खुलने से उग्रवादी लगातार बैकफुट पर हैं जिसकी वजह से नक्सलवाद से निपटने के लिए अब गोली का उत्तर गोली से देने की आवश्यकता नहीं पड़ रही है ये बयान प्रदेश के सीएम भूपेश बघेल ने दिया है दरअसल अपने भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के अनुसार सीएम बस्तर पहुंचे हुए हैं और शुक्रवार को प्रेसवार्ता के दौरान सीएम ने बोला कि कांग्रेस पार्टी के कार्यकाल में बस्तर में नक्सलवाद काफी बैकफुट पर है

कमजोर पड़ रहा नक्सलवाद

नक्सल मोर्चे पर तैनात जवान ग्रामीणों का दिल जीत रहे हैं यही वजह है कि ग्रामीण भी अब उग्रवादियों का साथ छोड़ मुख्यधारा में लौट रहे हैं और अपने गांवो में मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं सीएम ने बताया कि नक्सलवाद को मैंने निकट से देखा है और अधिकतर घटना के बाद मैं स्वयं उस स्थान पहुंचा हूं ऐसे में इन 3 वर्षों में गवर्नमेंट ने जो रणनीति बनाई है उससे नक्सलवाद कमजोर पड़ रहा है

मुख्यधारा से जुड़े ग्रामीण

मुख्यमंत्री ने बोला कि नक्सलवाद पनपने का सबसे मुख्य कारण था ग्रामीणों का गवर्नमेंट पर से विश्वास समाप्त होना ग्रामीण जवानों को अपना शत्रु समझ रहे थे जिस वजह से ग्रामीण जवानों और प्रशासनिक ऑफिसरों के बीच दूरी बन गई थी इसे पाटने का काम हमने किया है इससे लोग काफी आकर्षित हुए और नक्सलवाद से हटकर मुख्यधारा से जुड़े जिस वजह से बस्तर में नक्सलवाद काफी कमजोर हुआ

जल जंगल जमीन के अधिकार पर फोकस

मुख्यमंत्री ने बोला कि कांग्रेस पार्टी के इन तीन वर्ष के कार्यकाल में खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में गवर्नमेंट ने सिर्फ ग्रामीणों के जल जंगल जमीन के अधिकार पर फोकस किया ग्रामीण जल जंगल जमीन से जुड़ी जो भी सुविधा या योजना चाह रहे थे उसे गवर्नमेंट ने पूरा किया और अभी भी पूरा करते आ रही है वन अधिकार पट्टा, वन संसाधन मान्यता प्राप्त, तेंदूपत्ता बोनस, धान समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी जैसी कई योजनाओं से अंदरूनी क्षेत्रों के ग्रामीणों को फायदा मिला

अपनाई ये नीति

जिसके चलते उग्रवादियों ने ग्रामीणों पर से अपना विश्वास खो दिया और ग्रामीण ने गवर्नमेंट का साथ दिया सीएम ने बोला कि बस्तर में अब नक्सलवाद से निपटने के लिए गोली के बदले गोली नहीं बल्कि विकास, विश्वास और सुरक्षा के तर्ज पर गवर्नमेंट काम कर रही है

अबूझमाड़ में सर्वे का काम

मुख्यमंत्री ने बोला कि जिस क्षेत्र को उग्रवादियों का गढ़ बोला जाता था उस अबूझमाड़ में गवर्नमेंट ने सर्वे का काम प्रारम्भ कराया और यहां करीब 2500 किसानों को उनकी जमीन का पट्टा दिया इंद्रावती नदी पर नक्सलगढ़ को जोड़ने के लिए नए पुल बनाए गए और गांव में राशन दुकान खुले आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया, विद्यालय खोला गया और ग्रामीणों को सारी सुविधा भी मिल रही है यही वजह है कि नक्सलवाद तेजी से कमजोर पड़ा और अब जवानों को नक्सलवाद से निपटने के लिए गोली भी कम चलाना पड़ रहा है

कुछ लोग कर रहे कैंप का विरोध

इसके अतिरिक्त कुछ जगहों पर नए कैंप के विरोध पर सीएम से पूछे गए प्रश्न पर उन्होंने बोला कि अभी भी विरोध करने वाले कुछ लोग हैं, लेकिन उनके विरोध से कोई फर्क नहीं पड़ेगा मुख्यमंत्री बताया कि उन्हें लगातार नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पुलिस कैंप खोलने के लिए आवेदन मिल रहे हैं पहले से स्थिति काफी सुधरी है

यही वजह है कि कैंप खुलने से जवान ग्रामीणों का दिल जीत कर उनकी सहायता कर रहे हैं सीएम ने बोला कि नक्सलगढ़ में कई वर्षों से सिर्फ कैंप खोलने का प्रस्ताव था लेकिन अब इन 3 वर्षों में लगातार पुलिस कैंप खुलने से उग्रवादी संगठन लगातार बस्तर में कमजोर पड़ रहा है